Thursday, 9/6/2016 | 5:05 UTC+0

एकेडमी प्रसिद्ध उलमा की दृष्टि में


क़ाज़ी मुजाहिदुल इस्लाम क़ासमी (रह॰)

‘‘इस्लामी फ़िक़्ह एकेडमी (इन्डिया) एक ऐसी संस्था और संगठन है, जिस पर भारतीय मुसलमानों विशेष रूप से उलमा और धार्मिक चेतना रखने वाले मुसलमानों को स्वाभिमान और स्वाभिमान से अधिक अल्लाह का आभार व्यक्त करने का अधिकार प्राप्त है, यह एक शुद्ध रूप से रचनात्मक वैचारिक विद्या से सम्बन्धित और फ़िक़्ही संगठन और समूह है, जिसमें देश के बड़े-बड़े सही अक़ीदा रखने वाल और सही विचारधारा के वाहक और व्यापक ज्ञान के वाहक अलमा और कार्यकर्ता सम्मिलित हैं।’’

 

हज़रत मौलाना सैयद अबुल हसन अली नदवी  (रह॰)
(व्यवस्थापक नदवतुल उलमा लखनऊ)

‘‘मेरे जीवन का यह दूसरा अवसर है कि मुझे अत्यन्त प्रसन्नता का अनुभव हो रहा है, आपकी यह बैठक इस बात की दलील है कि आप सब लोग उम्मत की समस्याओं से चिन्तित हैं, नई समस्याओं पर विचार-विमर्श की आवश्यकता प्रत्येक युग में रही है और भारत में इस तरह का यह पहला समूह है, मैं मौलाना क़ाज़ी मुजाहिदुल इस्लाम क़ासमी साहब को इस महत्वपूर्ण बैठक को आयोजित करने पर मुबारकबाद देता हूं।’’

 

हज़रत मौलाना सैयद मिन्नतुल्लाह रहमानी
(अमीर-ए शरीअत बिहार, उड़ीसा व झारखण्ड)

‘‘इस्लामी फ़िक़्ह एकेडमी एक इस्लामी संस्था है, जो सामयिक समस्याओं और महत्वपूर्ण प्रश्नों पर विचार-विमर्श करती और क़ुरआन व सुन्नत की रौशनी में उनके समाधान के क्षेत्र में पिछले उन्नीस वर्षों से व्यापक सेवाएं कर रही है, भारत की महान संस्था दारुल उलूम देवबन्द (वक़्फ़) एकेडमी की सेवाओं और उपलब्धियों को श्रद्धांजलि अर्पित करता है।’’

 

हज़रत मौलाना मुहम्मद सालिम क़ासमी
(दारुल उलूम वक़्फ़ देवबन्द)

‘‘एकेडमी अपनी स्थापना ही के समय से ज्ञान-विज्ञान और वैचारिक पूंजी को फैलाने में प्रयासरत रही है, फ़िक़्ह के क्षेत्र के विशेषज्ञों के ज्ञान व विचार तथा बहसों को भी एकेडमी ने प्रसारित किया है, तथा एकेडमी एक त्रैमासिक पत्रिका भी प्रकाशित करती है जिसमें फ़िक़्ह से सम्बन्धित महत्वपूर्ण समस्याओं पर बहस और चर्चा होती है, इसके अतिरिक्त एकेडमी ने अब तक कई सेमिनार आयोजित किये हैं।’’

 

मौलाना सैयद मुहम्मद राबेअ हसनी नदवी
(व्यवस्थापक नवद्तुल उलमा लखनऊ)

‘‘एकेडमी ने फ़िक़्ही शोध और सभ्यता से सम्बन्धित समस्याओं के समाधान की खोज के क्षेत्र में बहुत व्यापक कार्य किये हैं, फ़िक़्ही बैठकों तथा सेमिनारों में विश्व के सभी भागों से इस्लामी फ़िक़्ह के उलमा ने भाग लिया और ज्ञान, फ़िक़्ह और शोध की रौशनी में बहुत सी समस्याओं के समाधान तक पहुँच प्राप्त की। मैं इस फ़िक़्ही एकेडमी को विश्व के मुसलमानों की सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता समझता हूं।’’

 

मौलाना सईदुर्रहमान आज़मी नदवी
(सम्पादक अल-बअसुल इस्लामी, व्यवस्थापक दारुल उलूम नदवतुल उलमा लखनऊ)

‘‘एकेडमी एक महत्वपूर्ण संस्था है जो इस्लाम और मुसलमानों की सेवा और आधुनिक युग की समस्याओं और फ़िक़्ही मसलों को इस्लामी शरीअत की रौशनी में हल करने के लिए हिन्दुस्तान में स्थापित है, विभिन्न मसलकों के उलमा और फ़क़ीहों को एक मंच पर एकत्र करने का ताज एकेडमी के सिर पर है।’’

 

मौलाना काका सईद अहमद उमरी
(व्यवस्थापक जामिया दारुस्सलाम उमराबाद, तमिलनाडु)

‘‘प्राचीन और आधुनिक ज्ञान के विद्वानों के बीच समानता पैदा हुई, एक-दूसरे के ज्ञान से लाभ प्राप्त हुआ, आधुनिक समस्याओं में नये ढंग से चिन्तन करने की प्रेरणा मिली, समय की आवश्यकताओं को देखते हुए एकेडमी की स्थापना अत्यन्त आवश्यक और लाभदायक है।’’

 

मुफ़्ती हबीबुर्रहमान ख़ैराबादी
(मुफ़्ती, दारुल उलूम देवबन्द)

‘‘यह फ़िक़्ह एकेडमी समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है, यह अच्छा और मुबारक क़दम है, हम इसका स्वागत करते हैं और भरोसा दिलाते हैं कि इस सम्बन्ध में हम पूरा सहयोग करेंगे, यह कार्य यद्यपि कठोर परिश्रम और चिन्तन चाहता है परन्तु आशा है कि सम्मानित उलमा क़ुरआन व हदीस के माध्यम से मार्गदर्शन करेंगे और अल्लाह तआला सफलता प्रदान करेगा।’’

 

मौलाना सिराजुल हसन
(पूर्व अमीर, जमाअत-ए इस्लामी, हिन्द)

‘‘इस्लामी फ़िक़्ह एकेडमी (इन्डिया) भारतीय मुस्लिम समाज की आवश्यकताओं को पूरा कर रही है और उन्हें नयी समस्याओं के इस्लामी समाधान का मागदर्शन कर रही है, इसके उद्देश्य प्रशंसनीय हैं और इसकी गतिविधियां उत्साहवद्धर्क हैं।’’

 

जनाब अब्दुल रहीम क़ुरैशी (एडवोकेट)
(अध्यक्ष मजालिस तामीर-ए मिल्लत हैदराबाद)

‘‘इस्लामी फ़िक़्ह एकेडमी (इन्डिया) एक इस्लामी संस्था है, जो अनेक वर्षों से भारतीय मुस्लिम सल्पसंख्यकों के समक्ष आने वाली समस्याओं के लिए चेतना और सामूहिक चिन्तन की आत्मा जागृत करने और सम्मानित उलमा के प्रयासों को एकत्र करने के लिए गम्भीर व निरन्तरता के साथ अपने कार्य में व्यस्त है, एकेडमी से सम्बन्धित सम्मानित उलमा परिश्रम, तक़्वा और परहेज़गारी में तल्लीन हैं।’’

 

डॉ॰ ताहा जाबिर फ़य्याज़ अलवानी
(पूर्व जनरल अध्यक्ष अन्तर्राष्ट्रीय इस्लामी चिन्तन संस्थान, अमेरिका)

‘‘इस्लामी फ़िक़्ह एकेडमी (इन्डिया) विभिन्न क्षेत्रों में जो महत्वपूर्ण कार्य कर रही है, इस पर अपने स्वाभिमान की भावना व्यक्त करने का मुझे सौभाग्य प्राप्त हो रहा है, सही इस्लामी मार्गदर्शन, सामूहिक चिन्तन की प्रवृत्ति उत्पन्न करना और भारत के मुस्लिम अल्पसंख्यकों के समक्ष आने वाली समस्याओं के उपयुक्त समाधान की तलाश एकेडमी की गतिविधियों में सम्मिलित हैं।’’

डॉ॰ मुहम्मद अल-हबीब बिन अल-खोजा (रह॰)
(पूर्व महासचिव, इस्लामी फ़िक़्ह एकेडमी, जद्दा)

‘‘इस्लामी फ़िक़्ह एकेडमी (इन्डिया) की स्थापना भारतीय उपमहाद्वीप में एक महत्वपूर्ण इस्लामी सभ्यता के प्रतीक की हैसियत रखती है, इस्लामी ज्ञान-विज्ञान और एकता उत्पन्न करने के प्रयास में एकेडमी निरन्तर गतिशील है।’’

 

डॉ॰ वहबा मुस्तफ़ा जुहैली
(दमिश्क़)

‘‘सामयिक समस्याओं की ओर उलमा का ध्यान उनकी समझ प्राप्त करने और उनके समाधान के प्रयास एक महत्वपूर्ण क़दम हैं, हम आशा करते हैं कि यह सिलसिला जारी रहेगा और उम्मत की वास्तविक स्थिति से उलमा सम्पर्क में रहेंगे।’’

 डॉ॰ जमालुद्दीन अतिया
(मिस्र)

‘‘इस्लामी फ़िक़्ह एकेडमी (इन्डिया) एक प्रसिद्ध संस्था है एकेडमी के ज़िम्मेदार और इससे सम्बन्धित लोग अत्यन्त निस्वार्थ भाव से एकेडमी के उद्देश्यों को पूरा करने में व्यस्त हैं, और भारत में इस्लाम और मुसलमानों की अनगिनत समस्याओं के समाधान के लिए प्रतिपल प्रयासरत हैं।
एकेडमी ने अब तक ज्ञान-विज्ञान, फ़िक़्ह, प्रशिक्षण और सांस्कृतिक विषयों पर विभिन्न भाषाओं में 70 से अधिक पुस्तकें प्रकाशित की हैं और सोलह फ़िक़्ही सेमिनार आयोजित किए हैं, इसके अतिरिक्त फ़िक़्ही विश्वकोष को उर्दू में अनुवाद करने का काम भी भली-भांति पूरा किया है।
हम एकेडमी के शुभचिन्तकों से आशा रखते हैं कि वे इस आधुनिक इस्लामी और फ़िक़्ही भवन को स्थायित्व प्रदान करने में सदैव सम्मिलित रहेंगे, क्योंकि एकेडमी समय की आवश्यकता और उसकी समस्याओं को हल करने और इस्लाम के आधार को स्थायित्व प्रदान करने में निरन्तर कार्यरत हैं।
अल्लाह तआला से दुआ है कि वह इनके नेक कार्यों को स्वीकार करे और इसका बेहतर बदला प्रदान करे। ‘आमीन’

डॉ॰ अब्दुल हमीद अहमद अबू सुलेमान
(अध्यक्ष अन्तर्राष्ट्रीय इस्लामी चिन्तन संस्थान अमेरिका)

‘‘मैं खुले दिल से यह मानता हूं कि इस्लामी फ़िक़्ह एकेडमी इन्डिया की सेवाएं महान हैं, इसकी हैसियत हिन्दुस्तान में आधुनिक समस्याओं के समाधान के सम्बन्ध में केन्द्र की है, लगभग उन्नीस वर्षों से एकेडमी निरन्तर शरीअत से सम्बन्धित समस्याओं के समाधान के लिए प्रयासरत है, अतः हिन्दुस्तान के विशेषज्ञ उलमा और फ़क़ीहों का इसे पूरा सहयोग प्राप्त है।
एकेडमी का ज्ञान-विज्ञान का क्षेत्र व्यापक है, लेकिन एक पहलू से शोध और अध्ययन का कार्य है, दूसरे पहलू से नवयुवक मदरसा छात्रों का वैचारिक प्रशिक्षण है, अर्थात् सभी पहलुओं से एकेडमी के प्रयास प्रशंसनीय हैं।
अल्लाह तआला क़ाज़ी मुजाहिदुल इस्लाम क़ासमी (रह॰) साहब को अपनी कृपा से शराबोर करे, उन्होंने एक ऐसी संस्था की आधारशिला रखी जो अपनी उपयोगिता में अपना उदाहरण आप है, वक़्फ मन्त्रालय से प्रकाशित फ़िक़्ही विश्वकोष का उर्दू अनुवाद भी एकेडमी के सुपुर्द है और वह उस कार्य को भली-भांति कर रही है।
अल्लाह की कृपा से इसके कुछ सेमिनारों में मुझे भाग लेने का अवसर प्राप्त हुआ, मैंने उपमहाद्वीप में हुए सेमिनारों में इसे सबसे अच्छा और लाभदायक पाया, मैं इस बात की पुष्टि करता हूं कि एकेडमी के ज्ञानवद्धर्क कार्यों की बहुतायत है, यहां उसे शुभचिन्तकों के सहयोग की आवश्यकता है, ताकि इस्लाम और मुसलमानों की सेवा अच्छी करह कर सके।
यहां यह उल्लेख अनुचित न होगा कि कुवैत के उलमा, फ़क़ीहों, विद्वानों, प्रोफ़ेसरों और शैख़ों और वहां की धार्मिक संस्थाओं के एकेडमी से प्रगाढ़ सम्बन्ध हैं।’’

डॉ॰ ख़ालिद अब्दुल्लाह अल-मज्कूर
(कुवैत)

‘‘इस्लामी फ़िक़्ह एकेडमी (इन्डिया) ने 22 वर्ष पहले अपनी शुभ यात्रा का प्रारम्भ किया और इन 19 वर्षों में मानव जीवन की आधुनिक समस्याओं में फ़िक़्ही और फ़िक़्ह और ज्ञान-विज्ञान में मार्गदर्शन के सम्बन्ध में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की, क्योंकि इस्लाम को सदैव नयी-नयी समस्याओं का समाना होता है और उनके समाधान के लिए इन जैसी संस्थाओं की अत्यन्त आवश्यकता है, सामूहिक चिन्तन, नई समस्याओं का समाधान और विभिन्न मसलकों के बीच मतभेद के होते हुए भी इस्लामी एकता एकेडमी के मौलिक उद्देश्यों में सम्मिलित है।
1989 ई॰ से 2012 तक एकेडमी के 21 सेमिनार आयोजित हो चुके हैं जिनमें 120 से अधिक आधुनिक और महत्वपूर्ण मामलों पर विचार-विमर्श के बाद सामूहिक फ़ैसले किये गये, एकेडमी के महत्वपूर्ण फ़ैसलों में ‘इस्लाम और विश्व शान्ति, इन्टरनेट आदि सम्मिलित हैं, तथा फ़िक़्ही विश्वकोष के 45 खण्डों का अनुवाद भी एकेडमी की महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
हम (ज़िम्मेदारान दारुल इफ़्ता मिस्र) एकेडमी की गतिविधियों और उसकी कार्यविधि को प्रशंसा की दृष्टि से देखते हैं और दुआ करते हैं कि मिल्लत की इस महान सेवा को लोग ध्यान की दृष्टि से देखें।’’

 

डॉ॰ अली जुमआ
(प्रधान मुफ़्ती, मिस्र)

‘‘इस्लामी फ़िक़्ह एकेडमी (इन्डिया) मुसलमानों के आधुनिक और पेश आने वाली समस्याओं के समाधान की बेहतरीन संस्था है, इसमें कोई सन्देह नहीं कि एकेडमी के विकास और सफलता में इसके ज़िम्मेदारों और कार्यकर्ताओं का पर्याप्त योगदान है, यह संस्था मुसलमानों में ज्ञान, चिन्तन और व्यावहारिक भलाई की भावना उत्पन्न करने में सफल है।’’

शैख़ अब्दुल रहमान बिन अब्दुल्लाह बिन अक़ील
(सऊदी अरब)

‘‘इस्लामी फ़िक़्ह एकेडमी (इन्डिया) भारत में उलमा और फ़क़ीहों के बीच एकता और गहरे सम्बन्ध और सामूहिक इज्तिहाद के रास्ते में प्रभावी भूमिका अदा कर रही है, आशा है कि इसके प्रयास सफल होंगे और मुसलमानों की अपनी मिल्ली समस्याएं सामूहिक रूप से हल की जायेंगी।’’

डॉ॰ जमाल बरज़न्जी
(उपाध्यक्ष, अन्तर्राष्ट्रीय इस्लामी चिन्तन संस्थान, अमेरिका)

‘‘मेरे लिए सौभाग्य की बात है कि अल्लाह ने मुझे एकेडमी के संस्थापकों से मिलने का अवसर प्रदान किया, जिसकी सथापना भारत के बड़े उलमा के संरक्षण में 1989 ई॰ में हुई, मुझे विश्वास है कि यह एकेडमी हिन्दुस्तान में जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में सेवाओं के लिए अद्वितीय हैं, एकेडमी के ज़िम्मेदारों का साथ देना और हर संभव सहयोग करना हमारा धार्मिक दायित्व है।’’

डॉ॰ अब्दुल्लाह बिन इब्राहीम अल-मुस्फ़िर
(सऊदी अरब)

‘‘इसमें कोई सन्देह नहीं कि इस्लामी फ़िक़्ह एकेडमी (इन्डिया) भारत में सामान्य इस्लामी दृष्टिकोणों को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है, इसके अतिरिक्त उलमा और फ़क़ीहों के पारस्परिक सम्बन्धों में स्थायित्व प्रदान करना, सामूहिक इज्तिहाद का प्रयास करना और नई समस्याओं का हर संभव समाधान तलाश करना इसके एजेंडे में सम्मिलित है।’’

डॉ॰ फ़तही मलकावी
(अन्तर्राष्ट्रीय इस्लामी चिन्तन संस्थान जार्डन)

‘‘इस्लामी फ़िक़्ह एकेडमी (इन्डिया) इस जीवित युग में हिन्दुस्तान के मुसलमानों के समक्ष आने वाली समस्याओं और मामलों को हल करने का बेहतरीन चित्र प्रस्तुत करती है, मैं शुभचिन्तक लोगों से निवेदन करता हूं कि एकेडमी का आर्थिक और भावनात्मक आवश्यकताओं की पूर्ति में सहयोग करें, ताकि उसका यह विकास जारी रहे।’’

 

डॉ॰ मुहम्मद उमर छाबरा
(सऊदी अरब)

‘‘आज इस समारोह में भाग लेने के बाद भारत के उलमा और ज्ञान-विज्ञान से जुड़े लोगों से मिलकर इस बात का अनुभव हो रहा है कि उन्होंने एकेडमी को स्थापित करके कितना बड़ा काम किया है, एकेडमी के अभिप्राय और उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए मुझे यह महसूस हो रहा है कि इस एकेडमी की स्थापना नबी (सल्ल॰) के एक आदेश पर अमल है।’’

जस्टिस मुहम्मद तक़ी उस्मानी
(पाकिस्तान)

‘‘मुझे बहुत अधिक मुसर्रत भी है और किसी क़दर हसात भी, मुसर्रत इस बात की है कि हिन्दुस्तान के उलमा किराम ने एक महान काम शुरू किया है जिसकी पूरे विश्व को और अक़लियत वाले देशों को सख़्त ज़रूरत है और हसरत यह है कि हम पाकिस्तान में होने के बावजूद संगठित और बड़े पैमाने पर ये काम शुरू नहीं कर सके। फ़िक़्ह एकेडमी ने बड़ा अहम क़दम उठाया है, मुद्दत से इसका इन्तिज़ार था।

 

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